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अभी-अभी : पासवान की बेटी ने खोला अपने पिता के खिलाफ मोर्चा, कहा-माफी मांगिए, वरना ठीक नहीं होगा

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PATNA : लोजपा चीफ रामविलास पासवान विरोधियों से निपटने की तैयारी में लगे हैं लेकिन इस सब के बीच उनके सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि उनके अपनों ने ही उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

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रामविलास पासवान राबड़ी देवी के खिलाफ बोल कर फंसते दिख रहे हैं। दरअसल कल राम विलास पासवान ने राबड़ी देवी पर इशारा करते हुए यह कहा था कि कोई भी अनपढ़ (अंगूठाछाप) मुख्यमंत्री बन जाता है। रामविलास पासवान के इस बयान पर आरजेडी मुखत तो हुआ है। रामविलास पासवान की बेटी आशा पासवान ने ही मोर्चा खोल दिया। आशा पासवान ने साफ तौर पर कहा है कि पापा ने राबड़ी देवी के लेकर जो बयान दिया है उस पर उन्हें माफी मांगना चाहिए। ऐसा बयान महिलाओं को अपमानित करने वाला है। इस बात को लेकर आशा पासवान इतनी गुस्से में हैं कि उन्होंने यह धमकी दे डाली है कि वो और उनकी मांग रविवार को लोजपा दफ्तर के बाहर धरने पर बैठेंगी।आशा पासवान के इस बागी तेवर के बाद लोजपा को पहले घर के मामले से निपटना होगा। जानकारों का कहना है कि अगर रामविलास पासवान की बेटी और पत्नी लोजपा दफ्तर के बाहर धरने पर बैठतीं है तो केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की सियासी किरकिरी होनी तय है।

ramvilas paswan

‘सवर्ण आरक्षण को सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज नहीं किया जा सकता, कोर्ट भी इसे इंटरटेन नहीं करेगा’ : लोजपा प्रमुख केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कि सवर्ण आरक्षण को चैलेंज नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार की तरह सवर्णों को दिया गया यह लॉलीपॉप नहीं है। सरकार ने संविधान में संशोधन कर दिया है। अब सुप्रीम कोर्ट भी इसे इंटरटेन नहीं करेगा। पार्टी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस में शुक्रवार को उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र में आरक्षण और उच्च न्यायालयों में बहाली के लिए न्यायिक सेवा का भी गठन होना चाहिए। अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण की मांग का कोई मतलब नहीं है। पिछड़ा वर्ग का हो या अगड़ा वर्ग का, सभी आरक्षण में अल्संख्यकों के लिए व्यवस्था है। वीपी सिंह ने अगड़ी जाति के होकर भी पिछड़ों को आरक्षण दिया। नरेन्द्र मोदी ने पिछड़ी जाति के होकर भी सवर्णों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की। संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण की व्यवस्था नहीं थी। अब केन्द्र सरकार ने यह व्यवस्था कर दी है।

श्री पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी सवर्णों को 15 प्रतिशत आरक्षण की मांग करती रही है। लेकिन दस प्रतिशत मिला तो इसका मतलब यह नहीं कि इसका विरोध किया जाए। इसका विरोध करने वाली पार्टियां बराबरी के भाव की विरोधी हैं। जातीय जनगणना से इसका कोई मलतब नहीं है। कांग्रेस दोमुही पार्टी है। एक सांसद विधेयक का समर्थन करता है तो दूसरे विरोध में बहस करता है। राजद केवल समाज को बांटना जानता है। केन्द्र के नये फैसले से दोनों दलों की नींद उड़ी हुई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व सांसद सूरजभान सिंह, सुनील पांडेय और नतून, अशरफ अंसारी व श्रवण कुमार अग्रवाल भी थे।

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